घर का वास्तु कैसे चेक करें

घर का वास्तु खुद चेक करने के लिए घर का नक्शा लें, कम्पास से सही उत्तर दिशा तय करें, नक्शे के बीच से आठ दिशाएं बनाएं और फिर देखें कि मुख्य द्वार, रसोई, बेडरूम, टॉयलेट और पूजा घर किस दिशा में आते हैं। इसके बाद हर कमरे की दिशा को नीचे दी गई पारंपरिक तालिका से मिलाएं। अलग-अलग ग्रंथों और वास्तु जानकारों की राय में थोड़ा अंतर होता है, इसलिए नतीजे को परंपरा की सामान्य सीख की तरह पढ़ें।

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मेज पर रखा घर का नक्शा और कम्पास
फोटो: Pavel Danilyuk / Pexels

पहला कदम: सही उत्तर दिशा तय करें

नक्शे पर बना उत्तर का तीर हमेशा सही नहीं होता, इसलिए घर के अंदर कम्पास या फोन के कम्पास से उत्तर दोबारा देखें। लोहे की अलमारी, फ्रिज और बिजली के मीटर से थोड़ा दूर खड़े होकर दो-तीन जगह से पढ़ें।

फिर नक्शे पर उत्तर का निशान उसी के अनुसार लगाएं। पूरी जांच इसी एक निशान पर टिकी है, इसलिए यहां जल्दबाजी न करें।

मुख्य कमरों की पारंपरिक दिशाएं (ज्यादातर ग्रंथों के अनुसार)
कमरापारंपरिक रूप से पसंदपारंपरिक रूप से टाला जाता है
मुख्य द्वारउत्तर, ईशान, पूर्व (पश्चिम भी चलता है)नैऋत्य, आग्नेय, दक्षिण
रसोई (चूल्हा)आग्नेय (वायव्य भी चलता है)ईशान, नैऋत्य, उत्तर
मास्टर बेडरूमनैऋत्य (वायव्य भी चलता है)ईशान, आग्नेय
टॉयलेटवायव्य, पश्चिम-उत्तर-पश्चिम, पूर्व-दक्षिण-पूर्वईशान, नैऋत्य, घर का बीच
पूजा घरईशान, उत्तर, पूर्वनैऋत्य, दक्षिण
सीढ़ियांनैऋत्य, दक्षिण, पश्चिमईशान, घर का बीच

दूसरा कदम: बीच का बिंदु और आठ दिशाएं

नक्शे के कोनों को तिरछी रेखाओं से जोड़ें। जहां रेखाएं मिलती हैं, वह घर का बीच का हिस्सा है, जिसे ब्रह्मस्थान कहते हैं। परंपरा में इसे खुला और हल्का रखने की सलाह दी जाती है।

इस बिंदु से आठ दिशाएं बनाएं: उत्तर, ईशान कोण (उत्तर-पूर्व), पूर्व, आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व), दक्षिण, नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम), पश्चिम और वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)।

तीसरा कदम: कमरों की जगह लिखें

अब हर कमरे के आगे लिखें कि वह किस दिशा में पड़ता है। मुख्य द्वार से शुरू करें, फिर रसोई में चूल्हे की जगह, मास्टर बेडरूम, बच्चों का कमरा, टॉयलेट, पूजा घर और सीढ़ियां।

जो कमरा दो दिशाओं में फैला हो, उसके लिए वह दिशा लिखें जिसमें उसका ज्यादा हिस्सा है, और यह बात अलग से नोट कर लें।

इस तरीके की सीमाएं

हाथ से की गई जांच में सबसे आम गलती उत्तर दिशा की होती है। कम्पास पास की धातु से भटक सकता है, और टेढ़े या L आकार के घर में बीच का बिंदु तय करना कठिन होता है।

दिशाओं के नियम अलग-अलग परंपराओं में थोड़े बदलते हैं। अगर किसी बदलाव में दीवार, पाइप या ढांचा शामिल हो, तो पहले किसी योग्य आर्किटेक्ट या इंजीनियर और स्थानीय प्राधिकरण से पूछें।

कमरा मेल न खाए तो

इनमें निर्माण का कोई काम नहीं है।

  • किसी कमरे की दिशा मेल न खाए तो पहले कमरे के अंदर का सामान देखें, जैसे चूल्हा, बिस्तर या पूजा की चौकी, जिन्हें बिना तोड़फोड़ हटाया जा सकता है।
  • ब्रह्मस्थान यानी घर के बीच वाले हिस्से से भारी सामान और कबाड़ हटाकर उसे खुला रखें।
  • मुख्य द्वार पर अच्छी रोशनी रखें और वहां जूते या सामान का ढेर न लगने दें।
  • दीवार तोड़ने या कमरा बदलने का फैसला सिर्फ वास्तु के लिए न करें। ढांचे से जुड़े काम के लिए योग्य आर्किटेक्ट या इंजीनियर से सलाह लें।

VastuLive में

VastuLive में आप घर का नक्शा अपलोड करें, उसकी फोटो लें या ऐप में स्केच बनाएं। ऐप कमरे, मुख्य द्वार और उत्तर का निशान पढ़ता है, जहां पक्का न हो वहां आपसे कमरे और उत्तर दिशा की पुष्टि करवाता है, और फिर स्कोर, हर कमरे का नतीजा उसके नियम के साथ और बिना तोड़फोड़ वाले सुझाव देता है, जिसे PDF में निकाला जा सकता है।

देखें ऐप कैसे काम करता है

सवाल

क्या फोन का कम्पास वास्तु चेक के लिए काफी है?

हां, अगर आप उसे धातु की चीजों से दूर रखकर दो-तीन जगह से पढ़ें। सभी जगह एक जैसा नतीजा आए तो उसे मानें।

नक्शा न हो तो घर का वास्तु कैसे देखें?

कागज पर कमरों का मोटा खाका बनाएं, कदमों से नाप लें और उस पर उत्तर का निशान लगाएं। मोटा खाका भी दिशाएं समझने के लिए काफी होता है।

सबसे पहले किस चीज की जांच करें?

उत्तर दिशा की, क्योंकि बाकी हर कमरे की दिशा उसी से तय होती है। उसके बाद मुख्य द्वार और रसोई देखें।

क्या फ्लैट का वास्तु भी इसी तरह चेक होता है?

हां, फ्लैट के अपने नक्शे पर यही तरीका लगता है। बीच का बिंदु फ्लैट के नक्शे से निकालें, पूरी इमारत से नहीं।

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यह पारंपरिक वास्तु ग्रंथों और परंपरा पर आधारित है। परंपराओं में अंतर होता है, और यहां कुछ भी किसी नतीजे का वादा नहीं करता। निर्माण, कानूनी या सुरक्षा के सवालों के लिए किसी योग्य आर्किटेक्ट या इंजीनियर से पूछें।