टॉयलेट वास्तु: शौचालय की सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार शौचालय के लिए उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण सबसे अच्छा माना जाता है, और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम या पूर्व-दक्षिण-पूर्व को भी ठीक माना जाता है। उत्तर-पूर्व (ईशान कोण), दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) और घर के बीच वाले हिस्से में टॉयलेट से परंपरा में बचने को कहा जाता है। ये ज्यादातर वास्तु जानकारों की आम राय है।

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खिड़की और टाइल वाला साफ बाथरूम
फोटो: Hari's Court Hotel / Unsplash

शौचालय किस दिशा में हो

उत्तर-पश्चिम को परंपरा में वायु का कोना कहा जाता है, और टॉयलेट या बाथरूम के लिए इसे सबसे उपयुक्त माना जाता है। पश्चिम-उत्तर-पश्चिम और पूर्व-दक्षिण-पूर्व की पतली पट्टियां भी नियमों में ठीक मानी जाती हैं।

सेप्टिक टैंक के लिए भी उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की सलाह दी जाती है, और उत्तर-पूर्व व दक्षिण-पश्चिम में उससे बचा जाता है।

टॉयलेट और बाथरूम की दिशा, पारंपरिक मान्यता के अनुसार
दिशापारंपरिक राय
उत्तर-पश्चिम (वायव्य)अच्छी मानी जाती है
पश्चिम-उत्तर-पश्चिमअच्छी मानी जाती है
पूर्व-दक्षिण-पूर्वअच्छी मानी जाती है
उत्तर-पूर्व (ईशान)टाली जाती है
दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)टाली जाती है
घर का बीच (ब्रह्मस्थान)टाला जाता है

शौचालय कहां न हो

ईशान कोण को जल और पूजा से जोड़ा जाता है, इसलिए वहां टॉयलेट को बड़ा दोष माना जाता है। नैऋत्य कोण में भी टॉयलेट से बचने को कहा जाता है।

घर का बीच का हिस्सा, जिसे ब्रह्मस्थान कहते हैं, खुला रखने की परंपरा है। यहां टॉयलेट, सीढ़ी या भारी निर्माण न हो। पूजा घर टॉयलेट से सटी दीवार पर न हो, यह भी आम सलाह है।

रोज की देखभाल

टॉयलेट में खिड़की या एग्जॉस्ट फैन हो, नल टपकते न हों और दरवाजा बंद रहे। ये बातें किसी भी दिशा के टॉयलेट के लिए समझदारी की हैं।

कमरा मेल न खाए तो

इनमें निर्माण का कोई काम नहीं है।

  • टॉयलेट का दरवाजा हमेशा बंद रखें और सीट का ढक्कन नीचे रखें।
  • एग्जॉस्ट फैन लगाएं या खिड़की खुली रखें ताकि नमी और बदबू न रहे।
  • टपकते नल और रिसते पाइप तुरंत ठीक करवाएं और फर्श सूखा रखें।
  • टॉयलेट की दीवार से सटा पूजा का मंदिर या चौकी हो तो उसे दूसरी दीवार पर ले जाएं।
  • टॉयलेट को तोड़कर दूसरी जगह बनाना पाइप और ढांचे का काम है। इसके लिए योग्य आर्किटेक्ट या प्लंबिंग इंजीनियर से सलाह लें।

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सवाल

टॉयलेट के लिए सबसे अच्छी दिशा कौन सी है?

परंपरा में उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण। पश्चिम-उत्तर-पश्चिम और पूर्व-दक्षिण-पूर्व भी ठीक माने जाते हैं।

उत्तर-पूर्व में टॉयलेट हो तो क्या करें?

इसे परंपरा में बड़ा दोष माना जाता है। बिना तोड़फोड़ के लोग उसे साफ, सूखा और बंद रखते हैं और पास से पूजा की जगह हटा देते हैं।

क्या घर के बीच में टॉयलेट हो सकता है?

परंपरा में घर का बीच का हिस्सा यानी ब्रह्मस्थान खुला रखने की सलाह है, इसलिए वहां टॉयलेट को टाला जाता है।

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यह पारंपरिक वास्तु ग्रंथों और परंपरा पर आधारित है। परंपराओं में अंतर होता है, और यहां कुछ भी किसी नतीजे का वादा नहीं करता। निर्माण, कानूनी या सुरक्षा के सवालों के लिए किसी योग्य आर्किटेक्ट या इंजीनियर से पूछें।